
उज्जैन, 27 मार्च: चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर उज्जैन में महाकाल के दरबार में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी. बाबा की प्रसिद्ध भस्म आरती के दौरान श्रद्धालु मंदिर पहुंचे. मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के नारों से गूंज उठा.
श्रद्धालु रात से ही दर्शन के लिए कतार में लगे थे. सुबह बाबा के कपाट खोले गए, भस्म आरती के बाद महाकाल का विशेष श्रृंगार हुआ.
भोर में भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर कपाट खोले गए. महानिर्वाणी अखाड़े ने पहले जलाभिषेक किया, फिर पंचामृत से स्नान करवाया. पंचामृत में दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, आणि फळांचा रस होता. अभिषेक के बाद भव्य भस्म आरती का आयोजन हुआ.
राम नवमी के कारण बाबा का श्रृंगार खास था. उनके माथे पर चांदी का त्रिपुंड और ‘राम’ लिखा गया, जो सभी का ध्यान आकर्षित कर रहा था. फूलों की मालाएं, बेलपत्र, चंदन और पूजा सामग्री से बाबा को सजाया गया. इसके बाद कपूर आरती की गई और भोग अर्पित किया गया.
भक्तों ने आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल के दिव्य रूप का अनुभव किया. ‘हर हर महादेव’ और ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारे गूंज रहे थे. मंदिर परिसर भक्ति भाव से भर गया.
यह आरती वैराग्य और मृत्यु के सत्य का प्रतीक है. बाबा पर चढ़ने वाली भस्म विशेष रूप से तैयार की जाती है. आरती के दौरान शिवलिंग पर लगभग ढाई किलो भस्म चढ़ाई जाती है, जिससे बाबा महाकाल को जगाने की परंपरा पूरी होती है.
भस्म आरती के दौरान महिलाएं घूंघट करती हैं, जबकि पुरुष धोती पहनते हैं.
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एनएस/पीएम